मर्म की टोकरी भरने को है
चलायमान सुधियों में
जिसने देखा
कदम से कदम मिलाते
हर क्षण को
चक्रारैव पंक्ति में
जहां
स्थान तलाशती
नित अभिनव होने को
अनगिन खुशियां....।
हां तुम हो पास ही
पर
तीसरा नेत्र कहां
वंचित हूं न......!
प्रेम का एहसास एहसास मात्र ही नहीं है इसे समझना शायद सबके बस की बात नहीं है इतनी आसानी से कोई कह दे कि "मैं तुमसे प्यार करता हूँ " यह बात गले से नहीं उतरती इसका होना तो तब होता है जब एक हूक सी उठे जो तोड़ कर रख दे सारा अभिमान अपने होने का गुमान और अपने दिल की बात आँखों तक आ जाये भर दे हृदय को - निर्मल व पावन भावों से ।