सारंगी वाले
बचपन में
दादी
दिया करती थी
भर पेट भोजन
और
साथ में ढेर सारा दान
प्रसन्न हो
बाबा सुनाते थे --
बदले में
कई निर्गुण..!
हम सब बच्चों की टोली
जमा हो जाती थी उनके आस-पास
हम सभी
बस इतना ही जानते थे
बाबा हैं तो
राम धुन ही गायेंगे....!
अब न दादी रहीं, न दादी का दान,
समय की करवट ने
छीन लिया बाबा, निर्गुण, रामधुन को ।
तो
अब नहीं आते
बाबा सारंगी वाले....!





9comments:
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बाबा सारंगी वाले आपकी भावुक, संवेदित आत्मीय प्रतिक्रिया है ।
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