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Wednesday, September 2, 2009

सागर से लहरें उठती हैं

सागर से लहरें उठती हैं
साहिल की ओर
निरन्तर बढ़ने को उत्सुक
इनकी उमंगें
शान्त पवन को झकझोरती हूई
निर्द्वन्द, निर्लिप्त निश्चेष्ट भाव से
पुकार रही हैं.................।
आओ......!
मुझमें निहित अन्तष्चेतना के साथ
यात्रा करें उस ओर
जहां बसती है दुनियां
रंग बिरंगी
प्रकृति के कुछ अद्भुत नजारे।

इन नजारों को
निरखने को तत्पर
हमारी आंखें
करने को अंकित आतुरता से.....!
अपने मानस पटल पर
रच जाय ऐसा आयाम
जो दे सके
अकल्पित, शाश्वत, निर्मल ,पावन
हृदयंगम हो जाय
ऐसी खुशियां
सबके बीच सौहार्द्र..........!

Sunday, August 2, 2009

प्रेम का एहसास

प्रेम का एहसास
एहसास मात्र ही नहीं है
इसे समझना शायद
सबके बस की बात नहीं है
इतनी आसानी से कोई कह दे
कि "मैं तुमसे प्यार करता हूँ "
यह बात गले से नहीं उतरती
इसका होना तो तब होता है
जब एक हूक सी उठे
जो तोड़ कर रख दे
सारा अभिमान
अपने होने का गुमान
और अपने दिल की बात
आँखों तक आ जाये
भर दे हृदय को -
निर्मल व पावन भावों से ।


चित्र : गूगल से साभार