दुर्घटनाए
जानलेवा न हों
ढाढस बाधा जाना ...!
बात समाझ में आती है ।
हाईवे पर छः घण्टे के अन्दर
छः छः मौतों ने
हिला कर रख दिया
सड़क पर वही चल रहे होते हैं
जिनसे न जाने कितनों के
अरमान जुड़े होते हैं ।
किसी मां ने लगाया होगा तिलक
जा बेटा ! तुझे आज अवश्य मिलेगी सफलता
बगल में परदे से झांक रही पत्नी
कितने अरमानों से की होगी मंगल कामना
हे ईश्वर ! अब हमारा चमन भी खिल उठे
चौखट पर खेल रही बिटिया ने देखा होगा.....!
अबकी पापा रेलगाड़ी जरूर ला देंगे
खूब चलाउंगी मै
कौन कहे जा करके
मां से !
पत्नी से ! और
उस नन्हीं सी बिटिया से ।
और कैसे ?
कि तुम्हारा ........!
अनायास, असमय, अकारण
हंसी अच्छी नहीं लगती....!
फिर यह मौत....?
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Tuesday, September 22, 2009
Sunday, August 30, 2009
क्या लड़कियों से नहीं संवरता है जीवन
कल तुम्हें देखा
एकटक निहारते हुए
तुम्हारी आंखों मे
गुजरे हुए कल की तस्वीर
स्पष्ट दिख रही थी
अब तुम लड़की से स्त्री हो चली थी
तुम्हें देख के ऐसा लग रहा था
मानो तुम्हारे मनोभाव
अपने आप को कोस रहें हो
हमें देख कर साथ-साथ।
अगर मैं भी लड़का होती
मुझसे जीवन में कुछ भी न छूटता
न मां-बाप का घर
ना ही सखि-सहेलियां
सब कुछ पास होते
अब तो पिया का घर
ही अपना आशियाना है।
मां ही क्यों कहती है......
वंश तो लड़के चलाते है
लड़की को पराये घर जाना है
उद्विग्न हो उठता है मन।
शायद मां भूल जाती है
वह भी एक लड़की ही है
फिर क्यों करती है भेद
क्या लड़कियों से नहीं संवरता है जीवन .........?
एकटक निहारते हुए
तुम्हारी आंखों मे
गुजरे हुए कल की तस्वीर
स्पष्ट दिख रही थी
अब तुम लड़की से स्त्री हो चली थी
तुम्हें देख के ऐसा लग रहा था
मानो तुम्हारे मनोभाव
अपने आप को कोस रहें हो
हमें देख कर साथ-साथ।
अगर मैं भी लड़का होती
मुझसे जीवन में कुछ भी न छूटता
न मां-बाप का घर
ना ही सखि-सहेलियां
सब कुछ पास होते
अब तो पिया का घर
ही अपना आशियाना है।
मां ही क्यों कहती है......
वंश तो लड़के चलाते है
लड़की को पराये घर जाना है
उद्विग्न हो उठता है मन।
शायद मां भूल जाती है
वह भी एक लड़की ही है
फिर क्यों करती है भेद
क्या लड़कियों से नहीं संवरता है जीवन .........?
Sunday, August 23, 2009
हरितालिका तीज
आज हरितालिका तीज है
सुना है
माता पार्वती ने इसी दिन
भगवान शंकर की अर्धांगिनी
होने का सौभाग्य पाया
इस परंपरा के अनुसार महिलाएं
रखती हैं व्रत पति के दीर्घायु होने के लिए।
आज की महिला
केवल घर में ही रहने वाली नहीं
कामकाजी भी हैं
उनके लिए यह व्रत
कितना जायज है ?
अब इनकी बराबर की भागीदारी है |
आज का पुरुष
इतना वफादार है क्या ?
इस प्रश्न के आगे
निरुत्तरित हो जाता हूं मैं...............!
सुना है
माता पार्वती ने इसी दिन
भगवान शंकर की अर्धांगिनी
होने का सौभाग्य पाया
इस परंपरा के अनुसार महिलाएं
रखती हैं व्रत पति के दीर्घायु होने के लिए।
आज की महिला
केवल घर में ही रहने वाली नहीं
कामकाजी भी हैं
उनके लिए यह व्रत
कितना जायज है ?
अब इनकी बराबर की भागीदारी है |
आज का पुरुष
इतना वफादार है क्या ?
इस प्रश्न के आगे
निरुत्तरित हो जाता हूं मैं...............!
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