सर्वस्व मेरे !
तम छंटा..
हूं मैं तुम्हारे
आलोक में ।
क्या है ...
निजशेष
उठा लिया है अपनी गोद में
तुम्हारी दृष्टि का सावन
मुसलाधार है या मद्धम
ज्ञात अब क्या बचा है ।
तुम्हारे आशीर्वचनों ने
समूचे दुःखों को हर लिया ...!
हां सर्वस्व मेरे.....!