दांव - पेच से दूर होता है बचपन
नहीं फिकर कहां क्या हो रहा है
जो सामने है
वही अपनी दुनिया है |
उसे क्या पता
बुद्धि बड़े रंग दिखाती है
अपने - पराये , हमारा - तुम्हारा
और भी बहुत कुछ |
खेल - कूद में गुस्सम - गुस्सा
लम्बी अवधि का नहीं होता
यहां अभिमान टकराता ही नहीं
इसी लिये मेल - मिलाप में देरी नहीं होती |
आज हम युवा हैं
बडी़ कूटनीति से रहना हमारा धर्म सा हो गया है
न हों आप ऐसे
सामाजिक मोह पास
आपको अपने निमित्त बना कर रख देगा
जीवन के उस मोड़ पर
जब आप अपनी दिशा निर्धारण कर रहे होते हैं |
यही लोग जो आज पसंद कर रहे हैं
आने वाले समय में
स्थापित नहीं किया खुद को
निन्दा करते देर नहीं लगती
अरे...!
कुछ नही कर रहे हो ....!
Showing posts with label बचपन. Show all posts
Showing posts with label बचपन. Show all posts
Thursday, September 17, 2009
Tuesday, September 15, 2009
सूर्य कभी अस्त होता है क्या....!
बचपन में गुरु जी ने
रटा डाला--
बेटा !
सूरज पूरब में उगता है
पश्चिम में अस्त होता है
मैने भी देखा
हां यह सच है ।
समय अपने गति से आगे बढ़ा
बड़ा हुआ मैं
सोचने समझने का स्तर
समानान्तर बढ़ता गया ।
विज्ञान और मानविकी के अध्ययन से
कुछ और ही बातें सामने आयी
मन अन्तर्द्वन्द से भर उठा -
अरे ! यह क्या ।
सूर्य कभी अस्त होता है क्या
ये हमारी पृथ्वी की गतियां हैं
जिससे उसके उदय और अस्त होने का भाव
निश्चित हो जाता है जेहन में ।
जिसने हमें ककहरा सिखाया
उस गुरू जी के प्रति
श्रद्धा भाव के सिवा
शंका भाव का प्रश्न ही नहीं
शैक्षिक विरासत की नींव
उन्होंने ही रखी तो थी....।
रटा डाला--
बेटा !
सूरज पूरब में उगता है
पश्चिम में अस्त होता है
मैने भी देखा
हां यह सच है ।
समय अपने गति से आगे बढ़ा
बड़ा हुआ मैं
सोचने समझने का स्तर
समानान्तर बढ़ता गया ।
विज्ञान और मानविकी के अध्ययन से
कुछ और ही बातें सामने आयी
मन अन्तर्द्वन्द से भर उठा -
अरे ! यह क्या ।
सूर्य कभी अस्त होता है क्या
ये हमारी पृथ्वी की गतियां हैं
जिससे उसके उदय और अस्त होने का भाव
निश्चित हो जाता है जेहन में ।
जिसने हमें ककहरा सिखाया
उस गुरू जी के प्रति
श्रद्धा भाव के सिवा
शंका भाव का प्रश्न ही नहीं
शैक्षिक विरासत की नींव
उन्होंने ही रखी तो थी....।
Subscribe to:
Posts (Atom)