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Saturday, September 19, 2009

क्षणिकाएं...!

तुम न थे
तो जिन्दगी न थी
तुम आये जिन्दगी में
तो रौनक आयी ।

तुम्हारे सामने
कुछ कह भी न सके
दिल की बात
दिल में ही रह गयी !

तुम्ही बताओ
तुम्हारे वास्ते के सिवा
अपना
भी कोई रास्ता था...?

मेरे मालिक !
तु मुझे बेरुखी न दे
तेरे दर से
ऐसे भी कोई जाता है !

तुमने देखा
तो मुंह फेर लिया
हम तो आये थे
तेरा होने को !