Saturday, July 25, 2009

तुम्हारा आना

तुम्हारा आना
जैसे ठंडी बयार का पास से हो कर गुजरना
तुम्हारा आना
जैसे चारु-चन्द्र की शीतलता का एहसास कराना
तुम्हारा आना
जैसे प्यासे खेतों में झमाझम बारिश का होना
तुम्हारा आना
जैसे बु्झते दीप का फिर से जलना
तुम्हारा आना
जैसे सब दु:खों को आते ही हर लेना
तुम्हारा आना................!

4 comments:

Dhiraj Shah said...

khubsurat aur tanha bayar

हिमांशु said...

आना सदा ही सुखद होता है - किसी का भी ।

raj said...

tumhara aana...or sath me boht si...unginit khushia lana....aise hi kuchh khoobsurat bhav...

M.A.Sharma "सेहर" said...

bahut sundar abhivyakti hai !!

comment karna thoda mushkil tha...y dont u make it easy ??May be little bit of modification on ur blog comment box...