Tuesday, October 13, 2009

आओ ! बातें करें.....

आओ ! बातें करें
आज क्यों नहीं है सुख-शान्ति ?

आओ ! बातें करें
कितना अस्त-व्यस्त है जन-जीवन ?

आओ ! बातें करें
इतना क्यों हाहाकार मचा है ?

आओ ! बातें करें
अरमानों ने क्यों दम तोड़ा है ?

आओ ! बातें करें
इन्तजार की घड़ी इतनी लम्बी क्यों है ?

आओ ! बातें करें
दरस को प्यासे नयन क्यों हैं ?

आओ ! बातें करें.....!

7 comments:

M VERMA said...

आओ ! बातें करें
इन्तजार की घड़ी इतनी लम्बी क्यों है ?
सही है बात करने के मुद्दो की कमी तो नही है --

वाणी गीत said...

कैसे करे बातें ...सर पर दिवाली है और बहुत काम बचा है ...
हाहा ..!!

हिमांशु । Himanshu said...

इतनी बातों के लिये अनगिन दिन और रातें चाहियें प्यारे !

सच में खाली कौन है इन दिनों ! आपाधापी भरा जीवन! वैसे यही तो बताना चाहा है तुमने भी इस रचना में । आभार ।

Arvind Mishra said...

केवल बातें हेमंत जी !

Mishra Pankaj said...

क्या बात करे हेमंत भाई महगाई ने मार डाला है :)

सुन्दर लिखे हो आप जी .. भाई साहब अपने तबियत के बारे में भी थोडा प्रकाश डाल दीजिये

शरद कोकास said...

सही है । मनुष्य के बीच सिर्फ सम्वाद की ही तो आवश्यकत है ।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर --इस खुलेपन की जितनी भी तारीफ़ करें कम है, दोस्त।

dher sari subh kamnaye
happy diwali

from sanjay bhaskar
haryana
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