निष्ठा से हो
कुछ भी कठिन नहीं
चट्टान सी समस्या भी
दरकने लगती है.....।
उसके बीच से
राह खुद-ब-खुद
आमंत्रण दे रही होती हैं....
देखो.....
मैं राह हूं
आओ ..!
ले जाना है मुझे.....!
वहां
जहां
मंजिल के पार
और भी बहुत कुछ है
क्योंकि जानता हूं मैं
मंजिल तो बस ...
एक पड़ाव है
और
इसके सिवा कुछ भी नहीं.....!




14comments:
Post a Comment
सुन्दर रचना । आभार ।
सोचें मत इतना । ब्लॉग में फाग मची है ..शामिल होइये ।
ढेर सारी शुभकामनायें.
संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
…. गरीब हूँ मैं.......
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
एक पड़ाव है
और
इसके सिवा कुछ भी नहीं.....!
बहुत सुन्दर।धन्यवाद।
Post a Comment