बाबूजी की बेटियां
अब
पापा की बेटियां हैं
बेड़ियां
गये जमाने की है बात
नहीं सिमटा है जीवन
केवल चूल्हे- चौके,राशन-पानी तक
लड़कों से कम नहीं है उनकी उड़ाने
वह भी
बैग टांगे
सायकिल से स्कूटी से बसों से
करती हैं यात्रायें
बेहतर जीवन
जीना
अब
कपोल कल्पना नहीं.....।
Sunday, August 16, 2009
Saturday, August 15, 2009
आजादी का जश्न
आजादी का जश्न
मनाने की घड़ी है
उत्सव में सराबोर होने से
स्वतंत्रता सेनानियों को याद
करने मात्र से ही
नहीं संवरेगा अपना देश
आज
समय की मांग है
देश का हर नागरिक
अपने अधिकारों के साथ-साथ
अपने कर्तव्यों को जाने और समझे
तभी हो सकेगी समुचित भागीदारी
देश के प्रति
और
फ़िर होगा.....
विकासशील भारत
विकसित भारत..........।
मनाने की घड़ी है
उत्सव में सराबोर होने से
स्वतंत्रता सेनानियों को याद
करने मात्र से ही
नहीं संवरेगा अपना देश
आज
समय की मांग है
देश का हर नागरिक
अपने अधिकारों के साथ-साथ
अपने कर्तव्यों को जाने और समझे
तभी हो सकेगी समुचित भागीदारी
देश के प्रति
और
फ़िर होगा.....
विकासशील भारत
विकसित भारत..........।
Friday, August 7, 2009
चुनौतियां हैं सामने
एक बालक देखता है
दुनिया का बावलापन
लोग कैसे आगे बढ़ रहे हैं
इसका प्रश्न उसके जेहन में है
जिसे खोजता फिरता है वह
अपने आस-पास
अपने को भ्रम में पाता है
जैसे जैसे बडा़ होता है
उसका संशय और भी बड़ा हो जाता है
जब तक वह बालक था
मस्त था
आज
वह बड़ा हो गया है
चुनौतियां है सामने
बढ़ रहा है चौराहे की ओर
जहां से खुलते हैं अनेक द्वार
सोचता है
चुनुंगा उसे ही
जो कर दे सफल
पर
यह रास्ता सही है
यह कहना
आज
कितना सही है........।
दुनिया का बावलापन
लोग कैसे आगे बढ़ रहे हैं
इसका प्रश्न उसके जेहन में है
जिसे खोजता फिरता है वह
अपने आस-पास
अपने को भ्रम में पाता है
जैसे जैसे बडा़ होता है
उसका संशय और भी बड़ा हो जाता है
जब तक वह बालक था
मस्त था
आज
वह बड़ा हो गया है
चुनौतियां है सामने
बढ़ रहा है चौराहे की ओर
जहां से खुलते हैं अनेक द्वार
सोचता है
चुनुंगा उसे ही
जो कर दे सफल
पर
यह रास्ता सही है
यह कहना
आज
कितना सही है........।
Thursday, August 6, 2009
सावन भी चला गया
नहीं बदला मौसम
इस बार.......
रिमझिम फुहारें
सावनी बयार
सब
सपनों में ही रह गयी
सावन भी चला गया.......
इस बार.......
रिमझिम फुहारें
सावनी बयार
सब
सपनों में ही रह गयी
सावन भी चला गया.......
Monday, August 3, 2009
बालक का हक़
बाल मनुहार
हर बालक का हक है
पर
जब हाँथों में
खेल का सामान
किताबों के बैग
गले में टाई
पानी की बोतल
पैरों में जूते
और भी बहुत कुछ
यह सब न मिले
फिर
वह बचपन
अपने अस्तित्व से लड़ता हुआ
सर पर टोकरी
हाँथों में फावड़ा लेकर
सिसकियाँ भरता
आ खड़ा होता है
मजदूरों की भीड़ में
एक समय था
आने दो आने
अठन्नी चवन्नी
में भरता था पेट
पर आज दस बीस में भी नहीं
भरता है पेट ,
कोई बालक
इससे ज्यादा भी पाता है क्या ?
हर बालक का हक है
पर
जब हाँथों में
खेल का सामान
किताबों के बैग
गले में टाई
पानी की बोतल
पैरों में जूते
और भी बहुत कुछ
यह सब न मिले
फिर
वह बचपन
अपने अस्तित्व से लड़ता हुआ
सर पर टोकरी
हाँथों में फावड़ा लेकर
सिसकियाँ भरता
आ खड़ा होता है
मजदूरों की भीड़ में
एक समय था
आने दो आने
अठन्नी चवन्नी
में भरता था पेट
पर आज दस बीस में भी नहीं
भरता है पेट ,
कोई बालक
इससे ज्यादा भी पाता है क्या ?
Sunday, August 2, 2009
प्रेम का एहसास
प्रेम का एहसासएहसास मात्र ही नहीं है
इसे समझना शायद
सबके बस की बात नहीं है
इतनी आसानी से कोई कह दे
कि "मैं तुमसे प्यार करता हूँ "
यह बात गले से नहीं उतरती
इसका होना तो तब होता है
जब एक हूक सी उठे
जो तोड़ कर रख दे
सारा अभिमान
अपने होने का गुमान
और अपने दिल की बात
आँखों तक आ जाये
भर दे हृदय को -
निर्मल व पावन भावों से ।
चित्र : गूगल से साभार
Saturday, August 1, 2009
संकट के बादल
सड़कें
दिन ब दिन
चौडी़ हो रही हैं
फिर भी जाम से छुट्कारा कहां
संकट के बादल
अपनी कहानी कहते.............
दिन ब दिन
चौडी़ हो रही हैं
फिर भी जाम से छुट्कारा कहां
संकट के बादल
अपनी कहानी कहते.............
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