Saturday, August 1, 2009

संकट के बादल

सड़कें
दिन ब दिन
चौडी़ हो रही हैं
फिर भी जाम से छुट्कारा कहां
संकट के बादल
अपनी कहानी कहते.............

2 comments:

Dhiraj Shah said...

यह तो हाल सब जगह का है ।

दिगम्बर नासवा said...

सब जगह बस ये ही रोना है........... काश सरकार समझ पाती........... लाजवाब लिखा है