Friday, August 21, 2009

विचार

विचार
मुखरित हो उठते हैं
भाषा में भी जान आ जाती है
मस्तक भी हो जाता है तेजमय
जब
आप हो जांय
कर्तव्यनिष्ठ
और फिर
जीवन
सुखमय
शान्तिमय
भेदभाव रहित हो जाता है.....!

5 comments:

हिमांशु । Himanshu said...

भेदभाव रहित जीवन ही तो नवनिर्माण की आवश्यकता है मित्र । लगे रहें ।

श्यामल सुमन said...

कर्तव्यनिष्ठ होना ही जीवन की बड़ी उपलब्धि है। काश सब कर्तव्यनिष्ठ हो पाते। अच्छा विचार।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

anuradha srivastav said...

आप हो जांय
कर्तव्यनिष्ठ
और फिर
जीवन
सुखमय
शान्तिमय
भेदभाव रहित हो जाता है.....! बहुत खूब

ओम आर्य said...

कर्तव्यनिष्ठ होना मानव जीवन का शील गुण है ....... ..बहुत ही सुन्दर

Dhiraj Shah said...

aap ke vichar se hi kartvaynishth jhalk rahi hai